नफरत के काबिल भी ना रहा

इस कदर गिरा लिया है उसने खुद को मेरी नजरों में,
कि मोहब्बत तो दूर वो मेरी नफरत के काबिल भी ना रहा |

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तेरी हर याद पे

पहले तेरी हर याद पे होठों पे मुस्कराहट आ जाती थी,
और आज तेरी हर याद पे आँख भर आती हैं |

वो मेरे दिल से उतरता गया

लम्हा लम्हा जैसे जैसे गुजरता गया,
मेरा हर एक सपना टूट कर बिखरता गया,
तोड़ा है कुछ इस कदर उस बेवफा ने मुझे,
कि हर याद के बाद वो मेरे दिल से उतरता गया|

ये ज़मीं भी मेरी होती

काश कुछ ऐसा होता कि तू मेरी होती,
तो ये आसमां भी मेरा होता और ये ज़मीं भी मेरी होती |

दिल तोड़ने से पहले

दिल तोड़ने से पहले इतना तो देख लेती ए बेवफा,
कि तेरे लिए इस दिल में मोहब्बत कितनी है |

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