नफरत के काबिल भी ना रहा

इस कदर गिरा लिया है उसने खुद को मेरी नजरों में,
कि मोहब्बत तो दूर वो मेरी नफरत के काबिल भी ना रहा |

तेरी हर याद पे

पहले तेरी हर याद पे होठों पे मुस्कराहट आ जाती थी,
और आज तेरी हर याद पे आँख भर आती हैं |

उसकी ज़रूरत बदल गयी

एक वक़्त तक मैं उसकी ज़रूरत बना रहा,
फिर हुआ यूँ कि उसकी ज़रूरत बदल गयी|

जख्म दिल पे खाए हैं

किस्मत कुछ ऐसी लिखवा के आये है,
खुशी से ज़्यादा गम हमने पाये हैं,
तमन्ना की थी एक छोटी सी खुशी की,
दिल टूटने के जख्म दिल पे खाए हैं,

सारा जहाँ एक साथ लुट गया है

फिर आज ज़िंदगी से विश्वास उठ गया है,
काँटा सा कोई सीने में घुस गया है,

मेरी बदनसीबी आज फिर मेरे सामने आ गयी,
मेरी ज़िंदगी का हर रोशन दिया बुझ गया है,

अब तो मेरी साँसे भी मेरी रूह के साथ नहीं हैं ,
मेरा तो सारा जहाँ एक साथ लुट गया है|

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