तेरी हर याद पे

पहले तेरी हर याद पे होठों पे मुस्कराहट आ जाती थी,
और आज तेरी हर याद पे आँख भर आती हैं |

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बहुत खुबसूरत हो तुम

कुछ बोलती सी ये आँखे तुम्हारी,
और चेहरा जैसे प्यार की कोई मूरत हो तुम,
होंठ हों जैसे हों गुलाब की पंखुड़ियाँ,
बेहद ही हसीन और बहुत खुबसूरत हो तुम|

दिखावे के लिए दोस्त बनाता नहीं हूँ

जलाकर शमाँ दोस्ती की फिर बुझाता नहीं हूँ,
हर किसी से मैं दोस्ती निभाता नहीं हूँ,
जिससे भी करता हूँ दोस्ती दिलो जान से करता हूँ,
सिर्फ दिखावे के लिए दोस्त बनाता नहीं हूँ |

वो मेरे दिल से उतरता गया

लम्हा लम्हा जैसे जैसे गुजरता गया,
मेरा हर एक सपना टूट कर बिखरता गया,
तोड़ा है कुछ इस कदर उस बेवफा ने मुझे,
कि हर याद के बाद वो मेरे दिल से उतरता गया|

ये ज़मीं भी मेरी होती

काश कुछ ऐसा होता कि तू मेरी होती,
तो ये आसमां भी मेरा होता और ये ज़मीं भी मेरी होती |

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