तमन्ना कर बैठा,

थक कर दर्द से आंसू बहाते बहाते,
आज फिर सम्भलने की तमन्ना कर बैठा,
मैं ठहरा हुआ था ज़िंदगी चल रही थी,
आज मैं भी चलने की तमन्ना कर बैठा,
बनने ना दिया कभी गम की हवाओं ने आशियाँ मेरा,
आज रुख हवाओ का बदलने की तमन्ना कर बैठा,

Advertisements

उसे खुद पे गुरुर आ गया

इसमें बुरा है क्या कि उसे खुद पे गुरुर आ गया,
हमने चाहा भी तो उसे मोहब्बत कि हदों से बढ़कर था |

एक पल लगता है

बहुत कम मिलते हैं, ज़िंदगी में पल मुस्कुराने के,
ज़िंदगी गुजरती है, अक्सर आंसू बहाने में,
पूरी ज़िंदगी लग जाती है, जिस रिश्ते को बनाते बनाते,
एक पल लगता है उस रिश्ते को, टूट कर बिखर जाने में |

आदत हो जिसे तूफानों से टकराने की

गर्दिशे क्या तोड़ेंगी उसे इस ज़माने की,
आदत हो जिसे तूफानों से टकराने की,
बनाया गया हो जो तूफानों के दौर में ,
आँधियाँ क्या हिलाएंगी जड़ें उस आशियाने की |