चकनाचूर हो गये

शीशे की तरह टूटकर चकनाचूर हो गये ,

लग ना जायें किसी को, हम सबसे दूर हो गए !!

नफरत के काबिल भी ना रहा

इस कदर गिरा लिया है उसने खुद को मेरी नजरों में,
कि मोहब्बत तो दूर वो मेरी नफरत के काबिल भी ना रहा |

तेरी हर याद पे

पहले तेरी हर याद पे होठों पे मुस्कराहट आ जाती थी,
और आज तेरी हर याद पे आँख भर आती हैं |

ये ज़मीं भी मेरी होती

काश कुछ ऐसा होता कि तू मेरी होती,
तो ये आसमां भी मेरा होता और ये ज़मीं भी मेरी होती |

सारा जहाँ एक साथ लुट गया है

फिर आज ज़िंदगी से विश्वास उठ गया है,
काँटा सा कोई सीने में घुस गया है,

मेरी बदनसीबी आज फिर मेरे सामने आ गयी,
मेरी ज़िंदगी का हर रोशन दिया बुझ गया है,

अब तो मेरी साँसे भी मेरी रूह के साथ नहीं हैं ,
मेरा तो सारा जहाँ एक साथ लुट गया है|

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