जख्म दिल पे खाए हैं

किस्मत कुछ ऐसी लिखवा के आये है,
खुशी से ज़्यादा गम हमने पाये हैं,
तमन्ना की थी एक छोटी सी खुशी की,
दिल टूटने के जख्म दिल पे खाए हैं,

तमन्ना कर बैठा,

थक कर दर्द से आंसू बहाते बहाते,
आज फिर सम्भलने की तमन्ना कर बैठा,
मैं ठहरा हुआ था ज़िंदगी चल रही थी,
आज मैं भी चलने की तमन्ना कर बैठा,
बनने ना दिया कभी गम की हवाओं ने आशियाँ मेरा,
आज रुख हवाओ का बदलने की तमन्ना कर बैठा,

गुजरा ज़माना बन गया हूँ

तकदीर का लिखा वो फ़साना बन गया हूँ,
मैं ज़िंदा हूँ मगर गुजरा ज़माना बन गया हूँ,

तेरी ही प्यास है

मेरी इन नज़रो को आज भी तेरी तलाश है,
तेरे बिना ज़िंदगी का हर लम्हा उदास है,
खुद को तो समझा लूँ मगर इस दिल का क्या करूँ ,
हर पल हर लम्हा इसको तेरी ही प्यास है,

मुझे तुझसे भी ज़्यादा है ज़रूरत तेरी

दिल को सुकून देती है सूरत तेरी ,
एक तुझसे ही तो है ज़िंदगी खूबसूरत मेरी,
काश तू जान ले मेरी मोहब्बत को एक बार,
मुझे तुझसे भी ज़्यादा है ज़रूरत तेरी,

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